(अनुवाद- राजेश झा)
(सांड्रा सिसनेरोस- Sandra Cisneros- अमेरिकी, मेक्सिकन कवि, लेखक। जन्म- १९५४, अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित। )

सुनो,
जब दुविधा में हो,
पहनो, नकली बघछपे वाली पोशाक।
जब दुविधा में हो,
गलत ही सही, दिल को बड़ा कर लो।
जब दुविधा में हो,
अभिवादन करो सबका,
जैसे सामने खड़े हों साक्षात बुद्ध।
जब दुविधा में हो,
डूब जाओ जीवनी पढ़ने में,
ताकि बच सको बड़ी गलतियों से।
जब दुविधा में हो,
ध्यान से सुनो गली में आवाज लगाते घुमंतू दुकानदार की पुकार-
ले लो सब्जी आलू, परवल, कद्दू…
भले ही वह कह रहा हो – बेच लो कबाड़।
जब दुविधा में हो,
साथ लेकर चलो हाथ का पंखा,
और एक रुमाल या तौलिया ।
जब दुविधा में हो,
सुनो बादलों की कौल।
जब दुविधा में हो,
कुछ न करो, रहने दो, यूं ही।
जब दुविधा में हो,
देखो सजीव-निर्जीव सभी को
जैसे हों वे अपने बंधु-बांधव, सगे-संबंधी, यार-दोस्त।
जब दुविधा में हो,
माफ कर दो अपनी सीमित दृष्टि को,
जैसे माफ करते हो अपने प्रति दूसरों की।
जब दुविधा में हो,
अपने दुखों के धागों को
लपेट दो पेड़ों मे तनों पर।
जब दुविधा में हो,
याद रखो – हम दौड़ रहे हैं,
गोल गोल चक्कर में,
जहाँ न कोई आगे है न पीछे,
जहाँ न शुरुआत है और न अंत।
इस दौड़ में होती है जीत – हम सभी की।
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