मलिवे मसिस्का  की कविताएं (मालावी)

अनुवाद- राजेश कुमार झा

Mpalive Msiska 1

कवि परिचय-मलिवे मसिस्का  का जन्म मालावी में हुआ। वर्तमान में वे लंदन के बर्कबेक विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक हैं। उन्होंने कविताओं के अलावा अफ्रीकी लेखक वुल सोईंका तथा चिनुआ अचेबे पर भी किताबें लिखी हैं।

केले का पत्ता

जाड़ों के बीतने के बाद,
लिखूंगा तुम्हारे लिए एक प्रेम गीत-
सरल जैसे कि इस ब्रह्मांड का आकार,
शांति से भरपूर जैसे केले के पत्ते का हरापन।
नहीं होगी उसमें पठारों पर हमारे पुरखों की समाधि की बात
पर होगी शायद  नृत्य करती औरतों
और बुढ़ाते हुए सरदार के ताबीजों की बात।

रुका है जब तक वक्त,
मत करना साझा मेरे दिलों की पंखुड़ी।
बारिश के लिए दुआ करने से,
सूने और गंजे पहाड़ों ने कर दिया है इंकार,
इसके पहले कि सो जाए रात, हमें हमें जाना ही होगा,
इतवार के दिन नहीं बजाते वे नगाड़े।

ले चलो नदी के पास मुझे
चाहता हूं मैं घड़ियाल के मुंह में प्यार का पेड़ लगाना,
बिच्छू की मुस्कुराहट है कितनी इंसानियत से भरी।

Banana Leaf -Mpalive Msiska-(Malawi)-English Text

haitian-market-scene-malawai-poem.jpg

 

कवि के लिए (डेरेक वाल्कॉट को समर्पित)

बूढ़े गायक, सिखाओ मुझे अपनी जवानी के गीत,
और बुढ़ापे की गंभीरता
तुम्हारे बिना कहां जान पाता मैं
दिल के टापू में बसे
धूप से नहाए गांवों की खूबसूरती,
खाड़ी के नमकीन अंगूरों का स्वाद,
क्रूर इतिहास के  शानदार मूंगों से समृद्ध,
जंजीरों में जकड़े अफ्रीका के लहूलहान शब्द।

ईश्वर ने बनाया टापुओं को,
लेकिन तुम्हीं ने दिया हमें वापस
आम और शराब से पगे लफ्ज,
दिलों में दहकने वाली आग
आत्मा में बसने वाली भूख
सारागासो समुद्र के रहस्यों की चाहत,
जैसे कि एक नयी धरती और नए स्वर्ग की झलक।

तुमने दिया नाम पक्षियों और पेड़ों को
उनकी जुबान में जो हैं तिरस्कृत,
मुर्दा संज्ञा-सर्वनाम-क्रियाओं को तुमने दी गति,
वापस दिलाए हमारे शब्द,
हमारी दुनिया।

अब नहीं होंगे निर्वासितों के गीत,
बचे रहने के लिए ये धरती गढ़ रही है अपने बिंब।
जो कुछ बचा खुचा, बनाएंगे उनसे एक अनंत वाष्प की छवि,
पथिक के अनछुए रास्तों का मलहम।

To the Poet (For Derek Walcott)-Mpalive Msiska-Malawi-Original Text

(वागर्थ- जून २०१८ में प्रकाशित)

 

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