क़ैद मैं वक़्त बिताने वाले लोगों के लिए कुछ मशविरा (नाज़िम हिकमत)

अनुवाद- राजेश झा

फाँसी देने के बजाय अगर जेल में ठूँस दिए जाते हो तुम
क्योंकि तुमने दुनिया में उम्मीद नहीं छोड़ी
लोगों और मुल्क से भरोसा नहीं छोड़ा ,
अगर किसी ने तुम्हारी ज़िंदगी के बचे हिस्से से
दस या पंद्रह साल निकाल लिए बाहर ,
तो ये मत कहना
कि अच्छा होता झंडे की तरह फंदे पर लटका देते मुझे-
अड़े रहना तुम और जीना।
हो सकता है कि तुम्हें ख़ुशी नहीं मिले,
मगर पवित्र कर्तव्य है तुम्हारा कि
एक और दिन ज़िंदा रहो ताकि नछोड़ सको दुश्मन को।

मुमकिन है कि तुम्हारे वजूद का एक हिस्सा पड़ जाए अकेला
जैसे पड़ा रहता है कुएँ की तलहटी में एक पत्थर।
लेकिन वजूद का दूसरा हिस्सा दुनिया की हलचलों के साथ रखना इतना बाबस्त,
ताकि चालीस दिन की दूरी पर फड़फड़ाए कहीं एक पत्ता,
तो तुम्हारे दिल में भी हो झुरझुरी।
खतों का इंतज़ार करना क़ैद के अंदर,
गुनगुनाना उदास गाने,
छत को निहारना रात रात भर जागकर,
अच्छा तो है लेकिन ख़तरनाक भी।

रोज दाढ़ी बनाते हुए अपने चेहरे को निहारना,
भूल जाना अपनी उम्र,
बालों में पैदा हो रहे जूं पर नज़र रखना,
रोटी के आख़िरी टुकड़े को खाना ज़रूर याद रखना
ठहाके लगाना मत भूलना।

किसे पता, हो सकता है कि जिस औरत से प्यार करते हो तुम,
उसने छोड़ दिया हो तुमसे प्यार करना।
मत कहना कि ये बड़ी बात नहीं,
दिल के अंदर हरी-भरी डाल के टूटने जैसी है यह बात।

जेल के अंदर गुलाबों और बगीचों का ख़याल बुरा होता है,
लेकिन समंदर और पहाड़ों के बारे में सोचना अच्छा है।
बिना थके लिखते रहो,पढ़ते रहो
और मेरी सलाह है बुनाई करो, आईने बनाओ।

मेरा मतलब है कि,
ऐसा नहीं कि जेल के अंदर
नहीं बिता सकते तुम दस या पंद्रह साल या इससे भी ज़्यादा वक्त।
बिता सकते हो ,
जब तक तुम्हारी छाती की बायीं तरफ़ जड़ा हीरा,
चमकता रहेगा बदस्तूर।

English Text- Some Advice to those who will serve time in Prison

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